राष्ट्रीय सहकारी नीति (2025–2045): गाँव-गाँव में समृद्धि और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत
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परिचय:
भारत सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को सशक्त और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025–2045 (National Cooperative Policy) को मंजूरी दी है। यह नीति अगले 20 वर्षों तक सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण विकास, किसानों की आय वृद्धि और स्थानीय रोजगार सृजन को केंद्र में रखेगी। इसका लक्ष्य है कि हर गाँव में कम से कम एक सक्रिय सहकारी समिति (Cooperative Society) स्थापित की जाए।🧭 नीति का उद्देश्य (Main Objectives):
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सहकारी संस्थाओं को आधुनिक, डिजिटल और आत्मनिर्भर बनाना।
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हर गाँव में एक कार्यशील PACS (Primary Agricultural Credit Society) की स्थापना।
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वर्ष 2026 तक 2 लाख PACS की स्थापना करना।
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युवाओं, महिलाओं और किसानों को सहकारिता के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनाना।
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सहकारी समितियों को MSME, डेयरी, मत्स्य पालन, फूड प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, बैंकिंग आदि में विस्तार देना।
🧱 सहकारिता क्या है?
सहकारिता एक ऐसी प्रणाली है जिसमें लोग स्वेच्छा से एकजुट होकर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए साझा स्वामित्व वाली संस्था बनाते हैं। इसमें "एक व्यक्ति, एक वोट" की व्यवस्था होती है और सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
🧑🌾 किसे मिलेगा लाभ?
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किसान: कृषि निवेश, उर्वरक, बीज, कर्ज़ और विपणन के लिए सहायता।
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महिला समूह: महिला SHG को मार्केटिंग, मैन्युफैक्चरिंग, वित्त और अन्य क्षेत्रों में प्रवेश।
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युवा उद्यमी: स्टार्टअप और लोकल बिज़नेस के लिए सहकारी मॉडल में प्रवेश।
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ग्रामीण बेरोजगार: रोजगार के नए अवसर सहकारी फैक्ट्रियों, डेयरी, फूड यूनिट्स आदि के माध्यम से।
🔧 सरकार द्वारा प्रस्तावित प्रमुख कदम:
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PACS को मल्टीपर्पज़ संस्था में बदला जाएगा, जिससे वे केवल ऋण ही नहीं बल्कि फर्टिलाइज़र डिस्ट्रीब्यूशन, कस्टम हायरिंग सेंटर, फूड प्रोसेसिंग आदि में भी काम करेंगी।
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सॉफ्टवेयर और डिजिटल रिकॉर्डिंग का संचालन सभी PACS में अनिवार्य होगा।
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सहकारी समितियों को कम ब्याज पर ऋण, भूमि और आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधा मिलेगी।
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राज्य सरकारों से मिलकर नीति को लागू करने के लिए Cooperative Monitoring Authority का गठन।
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PACS के लिए मानकीकृत उप-नियम (Model Bye-Laws) लागू होंगे।
📊 आंकड़ों में लक्ष्य:
| घटक | लक्ष्य (2026 तक) |
|---|---|
| PACS की संख्या | 2,00,000 |
| गाँवों की कवरेज | हर गाँव में 1+ PACS |
| महिला सहकारी समितियाँ | सभी राज्यों में 1+ मॉडल यूनिट |
| युवाओं को प्रशिक्षण | 10 लाख+ युवा प्रशिक्षण योजनाओं में |
📍 क्यों है यह नीति ज़रूरी?
भारत में अभी भी लगभग 63,000 गाँव ऐसे हैं जहाँ कोई भी सहकारी समिति कार्यरत नहीं है। सहकारी समितियाँ न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत आधार भी बनाती हैं। यह नीति गांव के लोगों को खुद का मालिक और भागीदार बनाने का अवसर देती है।
📝 निष्कर्ष:
राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025–2045 भारत को "सहकार से समृद्धि" के रास्ते पर ले जाएगी। यह न सिर्फ ग्रामीण भारत को बदलने वाली नीति है, बल्कि यह रोजगार, उत्पादन, विपणन और सामाजिक भागीदारी का समन्वय भी लाएगी। यदि इसे ज़मीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू किया गया, तो यह नीति आने वाले वर्षों में भारत की सबसे सफल ग्रामीण विकास योजनाओं में से एक बन सकती है।
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