प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत समूह दुर्घटना बीमा योजना (GAIS) 2025-26: पूरी जानकारी, लाभ, प्रीमियम और दावा प्रक्रिया
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत समूह दुर्घटना बीमा योजना (GAIS) – संपूर्ण जानकारी
परिचय
भारत सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र में सतत एवं जिम्मेदार विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) की शुरुआत की है। इसी योजना के अंतर्गत मछुआरों के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना (Group Accident Insurance Scheme – GAIS) लागू की गई है। इस योजना का उद्देश्य मछुआरों को विभिन्न प्रकार की आकस्मिक घटनाओं (Accidental Events) से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, जिससे उनके परिवार पर अचानक आने वाला आर्थिक बोझ कम किया जा सके।
GAIS के तहत 18 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के पात्र मछुआरों को दुर्घटना बीमा का लाभ मिलता है, जिसमें मृत्यु, स्थायी पूर्ण विकलांगता (Permanent Total Disability), स्थायी आंशिक विकलांगता (Permanent Partial Disability) और अस्पताल में भर्ती जैसी परिस्थितियों को कवर किया जाता है।
नीति की अवधि
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चौथे वर्ष की पॉलिसी अवधि: 01/06/2024 से 31/05/2025
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पाँचवें वर्ष (2025-26) की पॉलिसी अवधि: 01/06/2025 से 31/05/2026
पाँचवें वर्ष की पॉलिसी अवधि 1 जून 2025 से प्रारंभ होकर 31 मई 2026 तक चलेगी।
योजना के मुख्य उद्देश्य
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मछुआरों के जीवन में सुरक्षा कवच प्रदान करना।
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दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित या उनके परिजनों को आर्थिक सहयोग देना।
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मछुआरों के परिवार को आर्थिक असुरक्षा से बचाना।
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मछुआरों को उनके कार्य में सुरक्षा और आत्मविश्वास देना।
पात्रता
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लाभार्थी भारत का निवासी होना चाहिए।
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लाभार्थी की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
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मछुआरे का नाम राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के मत्स्य विभाग द्वारा स्वीकृत सूची में होना चाहिए।
बीमा कवरेज
GAIS को तीन प्रकार की पॉलिसियों के रूप में लागू किया गया है:
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प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)
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आकस्मिक मृत्यु: ₹2,00,000
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स्थायी पूर्ण विकलांगता (PTD): ₹2,00,000
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स्थायी आंशिक विकलांगता (PPD): अधिकतम ₹1,00,000
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ग्रुप जनता पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी (GJPA)
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आकस्मिक मृत्यु: ₹3,00,000
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PTD: ₹3,00,000
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विशेष आकस्मिक पॉलिसी (Special Contingency Policy – SCP)
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PPD: अधिकतम ₹1,50,000
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अस्पताल में भर्ती: ₹25,000
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प्रीमियम और लागत वहन
इस योजना में मछुआरे को कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता। पूरा प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार द्वारा साझा किया जाता है।
शेयरिंग पैटर्न:
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सामान्य राज्यों के लिए: 60:40 (केंद्र:राज्य)
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उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए: 90:10 (केंद्र:राज्य)
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केंद्र शासित प्रदेशों के लिए: 100% केंद्र सरकार
कुल प्रीमियम: ₹84 प्रति मछुआरा प्रति वर्ष
कार्यान्वयन एजेंसियां
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नोडल एजेंसी: राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB), हैदराबाद
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बीमा कंपनी: नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (NICL)
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बीमा इंटरमीडियरी: प्रोविडेंस इंडिया इंश्योरेंस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड
योजना का संचालन
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राज्य/UT का चयन कार्य – प्रत्येक राज्य/UT अपने क्षेत्र के पात्र मछुआरों की सूची NFDB को उपलब्ध कराता है।
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बीमा कवरेज की शुरुआत – बीमा कंपनी के पास प्रीमियम पहुंचते ही बीमा कवरेज सक्रिय हो जाता है।
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दावा निपटान (Claim Settlement) – दुर्घटना की सूचना, आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन के बाद लाभार्थी/परिजनों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भुगतान किया जाता है।
दावा प्रक्रिया (Claim Process)
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दुर्घटना होने पर जिला मत्स्य कार्यालय को सूचना दें।
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आवश्यक दस्तावेज एकत्रित कर बीमा सेल, NFDB को भेजें।
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बीमा कंपनी दस्तावेज सत्यापित कर दावा स्वीकृत करती है।
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भुगतान सीधे लाभार्थी/नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में DBT के माध्यम से होता है।
महत्वपूर्ण दस्तावेज
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दावा प्रपत्र (Claim Form)
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बीमाधारक का पहचान पत्र/आधार कार्ड
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मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) – मृत्यु के मामले में
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अस्पताल के दस्तावेज – विकलांगता या उपचार के मामले में
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बैंक खाता विवरण
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नामांकित व्यक्ति का प्रमाण पत्र
लाभ
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मछुआरों को निःशुल्क बीमा कवरेज।
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आकस्मिक मृत्यु और विकलांगता पर उच्च बीमा राशि।
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अस्पताल में भर्ती होने पर आर्थिक सहयोग।
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सरल और पारदर्शी दावा प्रक्रिया।
| क्रम संख्या | शेयरिंग पैटर्न | पॉलिसी का प्रकार | राज्य/UT का हिस्सा (₹) | केंद्र का हिस्सा (₹) | कुल (₹) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 60:40 (केंद्र : सामान्य राज्य) | PMSBY | 8.00 | 12.00 | 20.00 |
| GJPA | 24.00 | 36.00 | 60.00 | ||
| SCP | 1.60 | 2.40 | 4.00 | ||
| कुल | — | 33.60 | 50.40 | 84.00 | |
| 2 | 90:10 (केंद्र : उत्तर-पूर्व व हिमालयी राज्य) | PMSBY | 2.00 | 18.00 | 20.00 |
| GJPA | 6.00 | 54.00 | 60.00 | ||
| SCP | 0.40 | 3.60 | 4.00 | ||
| कुल | — | 8.40 | 75.60 | 84.00 | |
| 3 | 100% केंद्र (UTs) | PMSBY | — | 20.00 | 20.00 |
| GJPA | — | 60.00 | 60.00 | ||
| SCP | — | 4.00 | 4.00 | ||
| कुल | — | 84.00 | 84.00 |
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1: यह योजना किसके लिए है?
यह योजना भारत के सभी पात्र मछुआरों के लिए है, जिनकी उम्र 18 से 70 साल के बीच है और जिनका नाम राज्य/UT के मत्स्य विभाग की स्वीकृत सूची में है।
Q2: बीमा कंपनी कौन है?
इस योजना के तहत बीमा कवरेज M/s National Insurance Company Limited (NICL) द्वारा दिया जाता है।
Q3: बीमा का इंटरमीडियरी कौन है?
बीमा से जुड़े सभी कागज़ी कार्य, क्लेम प्रक्रिया, और सहायता M/s Providence India Insurance Broking Pvt. Ltd. द्वारा की जाती है।
Q4: प्रीमियम कितना है और कौन देता है?
कुल प्रीमियम ₹84 प्रति मछुआरा प्रति वर्ष है। मछुआरे को कुछ नहीं देना पड़ता, पूरा प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देते हैं।
Q5: इसमें कौन-कौन से लाभ मिलते हैं?
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आकस्मिक मृत्यु पर ₹5 लाख (PMSBY + GJPA)
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स्थायी पूर्ण विकलांगता पर ₹5 लाख
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स्थायी आंशिक विकलांगता पर अधिकतम ₹2.5 लाख (PPD + SCP)
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अस्पताल में भर्ती होने पर ₹25,000 तक सहायता
Q6: क्लेम कैसे करें?
दुर्घटना के बाद तुरंत जिला मत्स्य कार्यालय को सूचना दें, आवश्यक दस्तावेज जमा करें, और NFDB के बीमा सेल के माध्यम से क्लेम प्रोसेस होगा।
Q7: कवरेज कब से शुरू होता है?
बीमा कंपनी को प्रीमियम प्राप्त होते ही कवरेज शुरू हो जाता है।
2025-26 नई पॉलिसी अवधि से जुड़े बदलाव
📅 नई अवधि:
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शुरुआत: 01 जून 2025
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समाप्ति: 31 मई 2026
🆕 बदलाव:
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पॉलिसी का समय सीमा स्पष्ट रूप से घोषित — 2025-26 के लिए कवरेज बिल्कुल 1 जून 2025 से शुरू होकर 31 मई 2026 की मध्यरात्रि तक चलेगा।
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चौथे वर्ष (2024-25) के जैसे ही PMSBY + GJPA + SCP का संयोजन लागू रहेगा, लेकिन लाभार्थियों की संख्या और सूची राज्य/UT द्वारा अपडेट की जाएगी।
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योजना का प्रीमियम स्ट्रक्चर वही रहेगा — ₹84 प्रति मछुआरा प्रति वर्ष, जिसमें मछुआरे को कुछ नहीं देना होगा।
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लाभ का ढांचा (Accidental Death, PTD, PPD, Hospitalization) वही रहेगा, पर 2025-26 में नई लिस्ट और DBT की प्रक्रिया और तेज करने पर जोर दिया जाएगा।
निष्कर्ष
समूह दुर्घटना बीमा योजना (GAIS) भारत के मछुआरों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। मत्स्य पालन जैसे जोखिम भरे कार्य में लगे मछुआरों और उनके परिवारों को यह योजना आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत इसे लागू करने से न केवल मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि उनके जीवनस्तर में सुधार भी होता है।
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