Bharat-VISTAAR: Multilingual AI Platform for Smart Farming and Farmer Advisory in India

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  Bharat-VISTAAR: किसानों के लिए बहुभाषी AI आधारित कृषि सलाह मंच भारत में कृषि क्षेत्र तेजी से डिजिटल परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। इसी दिशा में एक नई पहल Bharat-VISTAAR सामने आई है, जो एक multilingual AI-based platform के रूप में किसानों को उनकी भाषा में व्यक्तिगत कृषि सलाह देने का लक्ष्य रखती है। यह मंच कृषि संसाधनों, मौसम, बाजार, फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी को एक ही जगह उपलब्ध कराएगा। यह पहल विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जिन्हें सही समय पर सही जानकारी नहीं मिल पाती। Bharat-VISTAAR क्या है? Bharat-VISTAAR एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो Artificial Intelligence (AI) और डेटा आधारित तकनीक का उपयोग करके किसानों को व्यक्तिगत (customised) सलाह देगा। यह प्लेटफॉर्म कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा, जिससे देश के अलग-अलग राज्यों के किसान अपनी भाषा में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य है: किसानों को समय पर सही सलाह देना फसल उत्पादन बढ़ाना लागत कम करना बाजार से बेहतर दाम दिलाने में मदद करना Bharat-VISTAAR प्लेटफॉर्म की मुख्य ...

PMFBY FAQ 2026: क्लेम, प्रीमियम, पात्रता और आवेदन से जुड़े सवाल

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) 2026

प्राकृतिक आपदा से किसान की फसल और आमदनी की सुरक्षा | पूरी जानकारी


भारत में खेती आज भी मौसम के भरोसे चलती है। बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, तूफान या कीट-रोग—एक झटका और किसान की पूरे साल की मेहनत खत्म हो जाती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) लागू की, ताकि फसल खराब होने पर किसान को आर्थिक सहारा मिल सके।

यह ब्लॉग PMFBY 2026 पर एक पूरा, भरोसेमंद और आसान गाइड है—जिसमें लाभ, पात्रता, प्रीमियम, आवेदन, क्लेम प्रक्रिया, समय-सीमा, आम समस्याएँ और उनके समाधान सब शामिल हैं।


🔶 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) क्या है?

PMFBY एक सरकारी बीमा योजना है, जिसके तहत किसान की फसल को प्राकृतिक आपदाओं, मौसम जनित जोखिमों और कीट-रोगों से होने वाले नुकसान पर बीमा सुरक्षा दी जाती है।

सरल शब्दों में—

अगर फसल खराब हुई, तो सरकार और बीमा कंपनी मिलकर नुकसान की भरपाई करती हैं।


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🎯 PMFBY योजना के उद्देश्य

  • किसानों को फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा

  • खेती में जोखिम कम कर आत्मविश्वास बढ़ाना

  • प्राकृतिक आपदाओं के बाद किसान को दोबारा खड़ा करना

  • आधुनिक और जोखिम-सहनशील खेती को बढ़ावा देना


🌾 PMFBY के अंतर्गत कौन-कौन से जोखिम कवर होते हैं?

1️⃣ प्राकृतिक आपदाएँ

  • सूखा

  • बाढ़

  • ओलावृष्टि

  • तूफान / चक्रवात

  • अत्यधिक वर्षा या कम वर्षा

2️⃣ जैविक जोखिम

  • कीट हमला

  • फसल रोग

3️⃣ फसल कटाई के बाद नुकसान

  • कटाई के 14 दिन के अंदर खेत में रखा अनाज खराब होना

4️⃣ स्थानीय आपदाएँ

  • भूस्खलन

  • बादल फटना

  • जलभराव


💰 किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?

PMFBY की सबसे बड़ी खासियत है बहुत कम प्रीमियम

फसल प्रकारकिसान का प्रीमियम
🌾 खरीफ फसल2%
🌾 रबी फसल1.5%
🌿 व्यावसायिक / बागवानी फसल5%

👉 बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार देती हैं।


👩‍🌾👨‍🌾 कौन-कौन किसान पात्र हैं? (Eligibility)

  • सभी किसान (छोटे, सीमांत और बड़े)

  • भूमिधर किसान

  • बटाईदार किसान

  • पट्टेदार किसान

  • PM-KISAN लाभार्थी स्वतः पात्र माने जाते हैं

नोट: किसान के पास खेती का प्रमाण होना जरूरी है।


📄 जरूरी दस्तावेज

  • आधार कार्ड

  • बैंक पासबुक

  • भूमि रिकॉर्ड / फसल बुवाई प्रमाण

  • मोबाइल नंबर

  • PM-KISAN ID (यदि उपलब्ध)


📝 PMFBY में आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)

तरीका 1: बैंक के माध्यम से

  • अगर आपने KCC / फसली ऋण लिया है,
    तो बैंक द्वारा बीमा ऑटो-कवर हो सकता है।

तरीका 2: CSC / वसुधा केंद्र से

  • नजदीकी CSC पर जाएँ

  • दस्तावेज दें

  • आवेदन रसीद जरूर लें

तरीका 3: ऑनलाइन पोर्टल से

  • PMFBY पोर्टल पर

  • किसान स्वयं आवेदन कर सकता है


⏰ आवेदन की समय-सीमा (बहुत जरूरी)

  • खरीफ फसल: आमतौर पर 31 जुलाई तक

  • रबी फसल: आमतौर पर 31 दिसंबर तक

👉 समय-सीमा चूकने पर बीमा मान्य नहीं होता


📢 फसल खराब होने पर क्लेम कैसे करें?

यह PMFBY का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🕒 सूचना देने की समय-सीमा

  • 72 घंटे के अंदर नुकसान की सूचना देना जरूरी

📞 सूचना कैसे दें?

  • बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर

  • CSC केंद्र पर

  • PMFBY पोर्टल / ऐप पर

📝 क्लेम प्रक्रिया

  1. नुकसान की सूचना

  2. खेत का सर्वे (ग्राम/ब्लॉक स्तर)

  3. उपज आकलन

  4. क्लेम स्वीकृति

  5. पैसा सीधे बैंक खाते में


💸 क्लेम की राशि कैसे तय होती है?

  • अधिसूचित फसल

  • क्षेत्र की औसत उपज

  • वास्तविक उपज

  • नुकसान का प्रतिशत

इन सभी के आधार पर बीमा राशि तय होती है।


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⚠️ PMFBY से जुड़ी आम समस्याएँ और समाधान

❌ क्लेम नहीं मिला

कारण: समय पर सूचना नहीं दी
समाधान: 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट करें

❌ नाम सूची में नहीं

कारण: आवेदन अधूरा
समाधान: CSC/बैंक से सत्यापन कराएँ

❌ प्रीमियम कटा लेकिन बीमा नहीं

कारण: बैंक डेटा अपलोड में गलती
समाधान: बैंक और कृषि कार्यालय से संपर्क


🌱 2026 में PMFBY क्यों और ज़रूरी है?

  • मौसम पहले से ज़्यादा अनिश्चित है

  • जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर बढ़ा है

  • लागत बढ़ रही है, जोखिम भी

  • बिना बीमा खेती अब बहुत जोखिम भरी है

PMFBY किसान के लिए सुरक्षा कवच है।


🧠 Scheme Sarthi की सलाह (किसानों के लिए)

  • हर सीजन बीमा जरूर कराएँ

  • रसीद और पॉलिसी नंबर सुरक्षित रखें

  • नुकसान होते ही रिपोर्ट करें

  • केवल सरकारी पोर्टल / CSC / बैंक से आवेदन करें

  • किसी एजेंट को पैसे न दें


❓ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) क्या है?

उत्तर:
PMFBY केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदाओं, मौसम जोखिम और कीट-रोगों से होने वाले नुकसान पर बीमा सुरक्षा दी जाती है।


Q2. PMFBY का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर:
इस योजना का उद्देश्य फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना, खेती का जोखिम कम करना और किसान को दोबारा खेती के लिए सक्षम बनाना है।


Q3. PMFBY में कौन-कौन से नुकसान कवर होते हैं?

उत्तर:

  • सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि

  • तूफान, चक्रवात

  • अत्यधिक या कम वर्षा

  • कीट और रोग

  • कटाई के बाद 14 दिन तक खेत में रखा अनाज खराब होना


Q4. किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?

उत्तर:

  • खरीफ फसल: 2%

  • रबी फसल: 1.5%

  • व्यावसायिक/बागवानी फसल: 5%
    बाकी प्रीमियम सरकार देती है।


Q5. PMFBY के लिए कौन पात्र है?

उत्तर:

  • छोटे, सीमांत और बड़े सभी किसान

  • भूमिधर किसान

  • बटाईदार और पट्टेदार किसान

  • PM-KISAN लाभार्थी किसान


Q6. PMFBY के लिए कौन-से दस्तावेज जरूरी हैं?

उत्तर:

  • आधार कार्ड

  • बैंक पासबुक

  • भूमि रिकॉर्ड / फसल बुवाई प्रमाण

  • मोबाइल नंबर


Q7. PMFBY में आवेदन कैसे करें?

उत्तर:
आप आवेदन कर सकते हैं:

  • बैंक के माध्यम से (यदि फसली ऋण/KCC लिया है)

  • CSC / वसुधा केंद्र से

  • PMFBY के ऑनलाइन पोर्टल से


Q8. क्या PMFBY में आवेदन की अंतिम तिथि होती है?

उत्तर:
हाँ।

  • खरीफ फसल: आमतौर पर 31 जुलाई तक

  • रबी फसल: आमतौर पर 31 दिसंबर तक
    समय-सीमा के बाद आवेदन मान्य नहीं होता।


Q9. फसल खराब होने पर क्लेम कैसे करें?

उत्तर:

  • नुकसान के 72 घंटे के अंदर सूचना देना अनिवार्य है

  • सूचना दी जा सकती है:

    • बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर

    • CSC केंद्र पर

    • PMFBY पोर्टल / ऐप पर


Q10. क्लेम की राशि कैसे तय होती है?

उत्तर:
क्लेम की राशि इन बातों पर निर्भर करती है:

  • अधिसूचित फसल

  • क्षेत्र की औसत उपज

  • वास्तविक उपज

  • नुकसान का प्रतिशत


Q11. क्लेम का पैसा कब मिलता है?

उत्तर:
सर्वे और सत्यापन पूरा होने के बाद
बीमा राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसमें कुछ समय लग सकता है।


Q12. अगर 72 घंटे में सूचना न दें तो क्या होगा?

उत्तर:
अगर तय समय में सूचना नहीं दी गई,
तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।


Q13. क्या PMFBY अनिवार्य है?

उत्तर:

  • फसली ऋण/KCC लेने वाले किसानों के लिए कई राज्यों में अनिवार्य

  • बिना ऋण वाले किसानों के लिए स्वैच्छिक


Q14. PMFBY में नाम क्यों कट जाता है?

उत्तर:
आम कारण:

  • समय पर प्रीमियम जमा न होना

  • आवेदन अधूरा होना

  • बैंक या भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी


Q15. PMFBY से जुड़ी शिकायत कहाँ करें?

उत्तर:

  • संबंधित बीमा कंपनी

  • CSC केंद्र

  • जिला कृषि कार्यालय

  • PMFBY पोर्टल का Grievance सेक्शन


Q16. क्या हर साल PMFBY कराना जरूरी है?

उत्तर:
हाँ। PMFBY फसल-सीजन आधारित योजना है।
हर खरीफ और रबी सीजन में नया आवेदन करना होता है।


Q17. PMFBY और KCC में क्या संबंध है?

उत्तर:
जो किसान KCC या फसली ऋण लेते हैं, उनका बीमा कई बार बैंक द्वारा स्वतः कर दिया जाता है, लेकिन किसान को खुद पुष्टि करनी चाहिए।


Q18. PMFBY से किसान को क्या सबसे बड़ा फायदा है?

उत्तर:

  • फसल खराब होने पर आय की सुरक्षा

  • जोखिम कम

  • खेती में आत्मविश्वास

  • आपदा में आर्थिक सहारा

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✍️ निष्कर्ष

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए
✔ जोखिम से सुरक्षा
✔ खेती में आत्मविश्वास
✔ आपदा में सहारा

अगर आप किसान हैं और अब तक फसल बीमा नहीं कराया है,
तो आप एक बहुत जरूरी सुरक्षा से वंचित हैं।

खेती भरोसे पर नहीं,
बीमा और योजना पर टिके—यही समझदारी है।



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